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Tuesday, 5 November 2013

अरविन्द और आप का घोषणा पत्र


दोस्तों.....सारा मूड खराब कर दिया अरविन्द केजरीवाल ने ...ये भी कोई घोषणा पत्र है...?..कहता है किसी मंत्री को लाल बत्ती नहीं दी जायेगी...आलिशान बंगले नहीं दिए जायेंगे...कोई सुरक्षा कर्मी नहीं दिए जायेंगे....भला ये भी कोई बात हुई...?..क्या फायदा मंत्री बनने का जब उसके आगे पीछे भारी लाव लश्कर न हो...?...खोपड़ी पर लाल बत्ती न जगमगा रही हो..?..मजा तो तब है जब हेवी ट्रैफिक में जनता का आवागमन रोक कर उनके बीच में से जनता को मूह चिढ़ाती हुई मंत्री जी का काफिला सर्र्र्र्र्र्र्र्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्रर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र से निकल जाए...अब हर रेड लाइट सिग्नल पर मंत्री जी कि गाडी आम आदमी कि तरह खड़ी मिले तो क्या अच्छा लगेगा..?...राज नीति का सारा ग्लैमर सारा चार्म ही ख़तम कर दिया....जनता में उसे देखने का क्रेज होता है जो कभी कभी दिखाई दे ..ऊपर से कहता है मंत्री कि खोपड़ी पर मजबूत लोकपाल का डंडा देकर रखेगा...अरविन्द तो हर गली मोहल्ले में रोज सभा करता नज़र आ जाता है इसलिए तो उसकी जनसभा में भीड़ मोदी जी कि रैली से कम होती है....अब मोदी जी को देखिये वो 5 साल में एक बार घर से बाहर निकलते हैं तो कितनी भीड़ जमा हो जाती है उन्हें देखने के लिए...जनता को मालूम होता है कि अगले 5 साल मोदी जी नज़र नहीं आने वाले इसलिए आज ही देख लो कि आखिर मोदी जी दिखाई कैसे देते हैं...मोदी जी को पता है कि ज्यादा एक्सपोज होने से ग्लैमर कम हो जाता है ...इसलिए खुद को ज्यादा एक्सपोज नहीं करते...बिना लाल बत्ती के बिना सुरक्षा बंदोबस्त के बिना लाव लश्कर के किसी मंत्री को देखने कि कल्पना से ही दिल घबराने लगता है....क्योंकि आदत नहीं है न...अब तो मेरा भी सर चकराने लगा है कि अरविन्द आखिर किसका एजेंट है जिसे इंडिया में राजनीति के

Wednesday, 23 October 2013

नेताओ का अंहकार तोड़ने के लिए "आप" को जिताना होगा


अब समय
आ गया नेताओ
को जबाव देने का

कि अब गददी जनता
सँभालेगी
और अपने पैसे का हिसाब रखेगी।

अब दलाली
और चोरी को
योजनाओ के बीच से हटना ही होगा।

अब देश के शिशु और बच्चे  भूख से नही मरेगे।
अब किसान आत्म हत्या नही करेगे।
अब मँहगाई और
बिजली की कीमते
आम आदमी को नही रुलायेगी।
अब बहनों की आबरु
सङको पर नीलाम नही होगी।
क्योकि
जनता अब अपने फैसले खुद लेगी
और अपनी किस्मत
खुद लिखेगी।

आम आदमी की सरकार बनाने के लिये
A.A.P.
को वोट दीजिये।
 
दिल्ली में आप की हार से अरविन्द की हार नही होगी...उस आम आदमी की हार हो जायेगी जो मानने लगा है बिना धन-बल के भी राजनीती में जाया जा सकता.. जो अब ये सोचने लगा है की राजनीती सिर्फ गुंडे-बलात्कारियो के लिए ही नही.. समाज के शिष्ट लोगो के लिए भी है...
दिल्ली यदि आप नही जीतती है तो देश के छुटभईए नेता भी अगर कोई आम आदमी उनके पास अपनी कोई समस्या लेकर जाएगा तो उसे यही बोलेंगे.. अपनी समस्या खुद सुलझाओ राजनीती में आओ... विधायक बनो सांसद बनो.... फिर अपने काम खुद करो.... पर आप की जित से नेताओ की ये कहने की हिम्मत नही होगी किसी आम व्यक्ति को की वो खुद राजनिति में आये..............

Tuesday, 22 October 2013

कहानी "आप" की "आम आदमी" की

दोस्तों,

दिल्ली में एक बहुत ही अमीर सेठ जी का बहुत बड़ा और शानदार व्यवसाय था....धन-दौलत की कोई कमी नहीं थी...भण्डार भरे थे और लक्ष्मी जी का आशीर्वाद उन पर कृपा बरसा रहा था...सब कुछ था उनके पास पर संतान का सुख उनकी किस्मत में नहीं था...









सेठ जी दिल के भी बहुत अमीर थे- एकदम राजा आदमी....दान-दक्षिणा में कभी कोई कमी नहीं....सेठ जी दुखिओं और लाचारों पर हमेशा रहम और करम करते थे...उनके मातहत कर्मचारी और नौकर उनकी वजह से कभी भी खुद को बेसहारा नहीं समझते थे और सेठजी की दरियादिली की वजह से उनसे बेहद खुश थे..यही वजह थी कि वो लोग सेठ जी के बेहद ही वफादार और निष्ठावान थे...

समय बीतता गया और नौकरों की भी अगली पीढियां जवान होने लग गयी थी...अब एक दिन सेठ जी ने कहा कि वो अब थोडा धरम -करम करना चाहते हैं और इसके लिए वो कुछ सालों के लिए शहर से बाहर रहेंगे.... और सेठ जी सबकुछ नौकरों के भरोसे छोड़कर तीर्थ यात्रा पर निकल गए...

उधर सेठ जी के पीछे से उनके सबसे वफादार नौकरों के वंशजों ने उनकी दौलत पर ऐश करना शुरू कर दिया..बड़ी-बड़ी गाड़ियां, गहने, मंहगे कपडे, बड़े होटल में पार्टियाँ, शराब और ना जाने क्या क्या...अगर कोई कंपनी का वफादार मेनेजर या कोई अन्य आदमी उन्हें इन गलत कामों के लिए गलती से टोक भी देता तो वो वो अपने बड़े-बुजुर्गों द्वारा सेठ जी की गयी सेवा और वफ़ादारी का बार-बार हवाला देकर उन्हें चुप करवा देते...

सभी नौकरों का यही हाल था...इस लुट में ये नौकर यदा-कदा आपस में लड़ भी पड़ते थे और एक दुसरे को नीचा दिखाने को षड्यंत्र करते रहते थे..पर एक बात की सहमति सबकी थी कि आपस में चाहे वो लोग जितना भी लड़ लें पर वक़त आने पर एक-दुसरे पर आंच नहीं आने देंगे.....

धीरे-धीरे सेठ जी की सारी दौलत ये लोग बेच कर खा गए..उनका व्यवसाय ठप्प कर दिया..उनकी जायदाद गिरवी रख दी..उनके कारखाने के मजदुर भूखे मरने लगे..और वहीँ दूसरी और इन नौकरों की खुद की दौलत “स्विस बैंक” के खातों का नम्बर बनकर अपना मुंह काला करवाकर भी इठलाती रहती थी...

इसी बीच एक दिन उस घर में एक नया मेहमान आया और उसने इन सब बातों का विरोध करना शुरू कर दिया...उसने उन पुराने नौकरों के कच्चे-चिट्ठे खोलने शुरू कर दिए...घर के सभी नौकर उस नए मेहमान के खिलाफ हो गए और उसे ही उलुल-जुलूल बकने लगे..

खैर एक दिन सेठ जी वापिस अपने घर लौट आये...नए मेहमान ने जब उनके पुराने नौकरों की पोल उनके सामने खोलनी चालू की तो सभी पुराने नौकर बगलें झाँकने लगे- उनसे कुछ उत्तर देते नहीं बन रहा था-- सभी एक दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा कर खुद को पाक-साफ़ साबित करने पर तुले थे....फिर एका-एक सबने मिलकर उस नए मेहमान पर ही एक साथ “गंभीर और जघन्य” इल्जामों का आक्रमण करना शुरू कर दिया-

१ इस नए मेहमान ने एक दिन घर के कमरे का शीशा तोड़ दिया.

२.इस नए मेहमान ने एक दिन दरवाज़ा ढंग से बंद नहीं किया जिसके वजह से रात को घर में जानवर घुस गया.

३. इस नए मेहमान ने एक दिन फ़ोन का रिसीवर फ़ोन पर ढंग से नहीं रखा जिससे दो घने तक किसी का फ़ोन नहीं आया.

४.इस नए मेहमान ने एक दिन पानी पीते-पीते कांच का गिलास गिरा कर तोड़ दिया.

५. इस नए मेहमान ने सुबह उठकर भगवान् जी की पूजा अर्चना नहीं की.

६. इस नए मेहमान ने सेठ जी के पडोसी से पैसे लेकर उन्हें बदनाम करने का षड्यंत्र रचा है आदि-आदि.

सेठी जी खामोश थे- सब कुछ उनकी आँखों के सामने था- उनकी लुटी हुई उनकी तिजोरी अपनी कहानी आप ही बयान कर रही थी...एक तरफ पुराने नौकर थे जिनपर तिजोरी लुटने का इलज़ाम था और दूसरी और वो नया मेहमान था जिसने इस लुट का विरोध कर सेठ जी को आगाह किया और जिस पर पुराने नौकरों ने “गंभीर और जघन्य” अपराधों का इलज़ाम लगाया था...

सेठ जी किस की बात को सही मान कर उसे घर में रहने देंगे और किसे घर के बाहर करेंगे ?

मित्रों, सेठ जी की जगह अगर आप होते तो आप क्या फैसला करते ?

मुल्क आपका, जमीन आपकी, आवाम आपकी, वोट आपका और फैसला भी आपका !!

जय हिन्द !! वन्दे मातरम !!

Monday, 14 October 2013

अरविन्द नेता नहीं.., सिपाही है हमदर्द है हम राही है..।।

अधिकारी बनने के बाद जब
उसकी पहली पोस्टिंग हुई तो उसके जन्म
दिन पर लोग बड़े बड़े तोहफे लेकर आए..,
अभी तक उसने अपना जन्म दिन
नहीं मनाया था..,
लेकिन मना करने पर भी कई लोग जोर देकर
तोहफे देकर चले गए..,
उसे पता था कि ये तोहफे उसे
नहीं बल्कि उसकी कुर्सी को दिए जा रहे
थे..,

जन्म दिन के बहाने भ्रष्टाचार सामने
खड़ा था..,
ज़बरन मिले तोहफों को उसने खोला और
अपनी हमसफ़र के साथ दिल्ली के फुटपाथ पर
उनकी सेल लगाकर बैठ गया (तब
उसे शायद ही कोई पहचानता होगा)..,
सारे तोहफे एक शाम में ही बिक गए..,
बिक्री से मिले पैसों को उसने एक
चेरिटी संस्था को दान कर दिया...।।।
यही अरविन्द आज भ्रष्टाचार के खिलाफ
हो रही जंग में सेनापति बनकर देश के
लाखों नौजवानों को प्रेरणा दे रहा है..,
अरविन्द ने जब यह घटना सुनाई तो समझ में
आया..,
कि काजल की कोठरी में से
भी बिना दाग बाहर निकलने का मनोबल
ही किसी को अरविंद केजरीवाल
बनाता है..।।।

दिल्ली किसकी होगी ?


प्रिय दोस्तों,

हम लोग बड़े शौभाग्य शाली हैं की हमें अब अपना देश बचाने और बढाने का मौका मिल रहा है।
पिछले 65 साल से भाजपा और कांग्रेस हमें क्या दे रहें हैं, और क्या देते आ रहे हैं ये आप सभी लोग अच्छी तरीके से जानते हैं।
कांग्रेस ने तो जिसमें बेशर्मी और लूट की सारी हदें तोड़ दी है। इस लिए अब कुछ लोग भाजपा से उम्मीद लगाये बैठे हैं।
और उम्मीद क्यों ना लगायें?
क्योंकि इसके अलावा और कोई विकल्प भी नहीं था लोगो के पास।

परन्तु अब ऐसा नहीं हैं क्योंकि अब
हमें श्री अरविन्द केजरीवाल जी ने "आम आदमी पार्टी" नाम का एक ईमानदार, पारदर्शी और भ्रष्ट मुक्त विकल्प दिया है।

आम आदमी पार्टी एक अच्छा विकल्प कैसे है?
और बीजेपी-कांग्रेस से अलग कैसे है आम आदमी पार्टी?

आम आदमी पार्टी :-
1. अन्ना हजारे जी वाला जनलोकपाल दे रही है, घूसखोर और भ्रष्ट लोगो को जेल भेजने के लिए और उनकी सारी संपत्ति जप्त करने के लिए।
2. राईट तो रिकॉल दे रही है जिससे किसी भी मंत्री के भ्रष्ट हो जाने पर आप उसे वापस बुला सकते हैं 5 साल तक चुनाव का इन्तजार नहीं करना पड़ेगा।
3. सच्चा स्वराज की व्यवस्था लागू करेगी, जिसके बाद सारे मंत्री और अफसर लोग सीधे जनता को रिपोर्ट करेंगें। मतलब देश की मालिक जनता होगी।
4. आम आदमी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार लाल बत्ती गाडी, बँगला और सुरक्षा गार्ड नही लेकर चलेगा। वो जनता का सेवक बन के रहेगा।(व्यवस्था परिवर्तन).
5. आपके इलाके के स्कूल, अस्पताल ,राशन और विकास कार्य सब आपकी देख रेख में होगा, तो उसकी अच्छाई-बुराई के लिए जिम्मेदार और मालिक भी जनता ही होगी।
6. सारी राजनीतिक पार्टियां RTI के दायरे में होंगी।
7. सारी जांच एजेंसी (जैसे CBI) स्वतंत्र होंगी, सरकार के आधीन नहीं रहेगी, जिससे की कल को यदि कोई मंत्री भ्रष्ट हो जाता है तो आप स्वतंत्र जांच करा सकें और उसे जेल भेज सकें।
8. किसी भी दागी या अपराधी को टिकेट नहीं देगी और न ही उसे संसद में भेजेगी।

हैं तो और भी चीजें बताने को परन्तु क्या इतना भी कम है? क्या इतना भी हमें BJP-CONGRESS दे रहे हैं?
ये दोनों पार्टियाँ हमें कभी इस भ्रष्ट तंत्र से मुक्ति नहीं दिला सकते।
इनका तो एक ही मकसद है लूट लो जितना लूट सको, कभी हम कभी तुम।

क्या आप लोग जानते है की भारत में जितना पैसा ये मंत्री-अधिकारी लोग खा रहे है वो सारा पैसा हमारा-आपका है और यदि वही पैसा हम लोगो की सही जरूरतों पे खर्च करें तो भारत 5 साल में ही विकसित देशों की सूची में होगा।

अब आप लोग फैसला करके बताओ की कौन अच्छा है और किसको आप चुनेंगे।
a. आम आदमी पार्टी
b. भाजपा
c. कांग्रेस
 

Saturday, 12 October 2013

रजत शर्मा की आप की अदालत और स्वराज

जिसने इंडिया टीवी पर रजत शर्मा का "आप की अदालत" प्रोग्राम देखा होगा,वो जानते होंगे की "आम आदमी पार्टी" के विज़न के मुद्दे पर अरविन्द केजरीवाल की "स्वराज" किताब का भी एक बार वहां थोडा सा जिक्र हुआ था,जिसमे अरविन्द जी (सिर्फ उतना ही बता सके की) कैसे उन्होंने भारत में घूम घूम कर बहोत सारे लोगो से सम्पर्क करके उन्होंने खुद "स्वराज" किताब लिखी है .

आगे की अधूरी, मगर महत्वपूर्ण बात अब आपको सोशल मीडिया कहेगा....

अरविन्द जी ने एक प्रतिभाशाली इंजिनियर और साइंटिस्ट की तरह हमारे आज के भारत की लोगो की स्थानीय समस्या का गहरा अध्ययन और एनालिसिस किया और उन्होंने पाया की हमारे यहाँ सिर्फ पांच साल में एक बार वोट देनो को ही लोग "लोकतंत्र" समज बैठे है,सच्चा लोकतंत्र वो होता है जिसमे लोगो की समस्या के समाधान देने के वक़्त उनकी भागीदारी हो, जो आम आदमी को (ज्यादा से ज्यादा और जरुरी) सत्ता देने से ही संभव है यानी की हमे सत्ता का विकेंद्रीकरण करने की जरुरत है ,जिसके लिए भगत सिंह ने अपनी कुरबानी दी थी,वरना सिर्फ गोरे अंग्रेज की जगह काले अंग्रेज को सत्ता देने के लिए हमने आज़ादी नहीं पाई है ! "स्वराज" की बात को सक्षिप्त में रखने के लिए कहेना चाहिए की लोगो को एक बार सत्ता देदो, विकास (सड़क,बिजली,फ्लाय ओवर,रोजगार इत्यादि ) तो लोग खुद अपने आप अपने हिसाब से कर लेंगे !

दुसरे राज्य की बात छोडो,विकास की बड़ी-बड़ी बाते करने वाला - गाँधी जी का - गुजरात भी आज़ादी के इतने सालो बाद भी आज "स्वराज" (सत्ता के वीकंद्रिकरण) के लिए तरस रहा है ! अरविन्द केजरीवाल जी की बात बिलकुल सही है की हमे JP आन्दोलन के बाद सिर्फ "कांग्रेस हटाओ-कांग्रेस हटाओ" के नारे से हुयी "सत्ता परिवर्तन" नहीं मगर संपूर्ण "व्यवस्था परिवर्तन" की जरुरत है ...
हमे चाहिए जन लोकपाल,
हम चाहिये राईट टू रिजेक्ट,
हमे चाहिए राईट टू रिकॉल ....
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हमे चाहिए सच्चा स्वराज !

राजनीति ने रूचि लेने वाले (यानी अपने देश की समस्या को सुलाज़ाने में रूचि लेने वाले सभी लोग, चाहे वो किसी भी पार्टी का समर्थक क्यों ना हो उन्हें ) अरविन्द केजरीवाल का "स्वराज" जरुर एक बार पढ़ना चाहिए,जो आप को इस "व्यवस्था परिवर्तन" की लड़ाई में अपना योगदान देने के लिए जरुर प्रेरित करेगा ....

Link of "Swaraj" book :स्वराज

आम आदमी जिंदाबाद !
लोकतंत्र जिंदाबाद !